प्रश्न. पारंपरिक पत्रकारिता और वेब पत्रकारिता के बीच में अंतर स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर:-
सामानत: पारम्परिक पत्रकारिता उसे कहते हैं जो कई संदियों के स्वरुप को वर्त्तमान स्तिथि में बनाये रखता है। वर्त्तमान में पारम्परिक पत्रकारिता का स्त्रोत प्रिंटिंग प्रेस है , जो कागज में छापती है।
भारत में प्रिंटिंग समाचार पत्र का नीव 1780 में एक अँगरेज़ व्यक्ति जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने रखी , जिन्होंने अंग्रेज़ो के दुवारा किये जा रहे गलत कामों को लोगो को बताने के लिए प्रिंटिंग समाचार पत्र की स्थापना की। यह समाचार पत्र बंगाल हिक्की गज़ट के नाम से जाना गया। इस तरह जेम्स ऑगस्टस हिक्की भारतीय पत्रकारिता के जनक बन गए।
1990 के दशक के पहले भारत में पारम्परिक पत्रकारिता को चुनौती देने वाला कोई नहीं था , यहाँ तक की डिजिटल मीडिया भी इसे चुनौती देने में असमर्थ थी। लेकिन 1990 आते-आते परम्परिक पत्रकारिता को चुनौती देने के लिए वेब-पत्रकारिता आ धमकी , उस समय कोई सोचा भी नहीं होगा की वेब पत्रकारिता इस तरह आगे बढ़ेगी की प्रिंटिंग प्रेस ही नहीं ,डिजिटल मीडिया को भी कही पीछे छोड़ देगी।
2000 ई. आते-आते वेब-पत्रकारिता ने बता दिया की आने वाला समय वेब-पत्रकारिता का है। और वेब-पत्रकारिता जो 90 के दसक में ही नई मीडिया के नाम से जाना गया , आज लगभग 25 साल बाद भी नई मीडिया के नाम से ही जान जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण इसकी असीमित दायरा है।
दरअसल वेब-पत्रकारिता इंटरनेट पर उपलब्ध करायी गई समाचार है। जो पारम्परिक पत्रकारिता की तरह समाचार तो उपलब्ध कराती है , परन्तु यह पारम्परिक पत्रकरिता के उलट लोगो के ऑनलाइन समाचर उपलब्ध कराती है।
इसकी दायरा इतनी व्यापक है कि ये डिजिटल मीडिया को भी अपने में समेट लेती है। इसके साथ ही यह बड़ी ही सुगमता से विशव के किसी भी कोने से सुगमता से देखा जा सकता है। जिसके लिए एक इंटरनेट एक्सेस डिवाइस रहना चाहिए। इतना ही नहीं यह किसी भी पुराने समाचार को कभी भी एक्सेस करने का जरिया है। साथ ही यहाँ समाचार हर नया उपलब्ध कराया जा सकता है।
वही पारम्परिक पत्रकारित में हमें किसी भी जानकारी के लिए कम-से-कम सुबह का इंतज़ार करना पड़ता है , यह सुगमता से हर जगह उपलब्ध नहीं है। किसी पुराने समाचार को ढूढ़ने में खासे मुशकील का सामना करना पड़ता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें